क्या है मणिपुर में हिंसक प्रदर्शन करने वाला अरामबाई तेंगगोल, कुकी समुदाय से क्यों है 36 का आंकड़ा?

मणिपुर की राजधानी इंफाल में एक बार फिर से प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. अरामबाई तेंगगोल के एक सदस्य की गिरफ्तारी के बाद शनिवार (7 जून 2025) की रात से ये प्रदर्शन शुरू हुए हैं. इसके बाद मणिपुर के पांच जिलों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है. वहीं, प्रदर्शन के दौरान इस मैतेई वालंटियर समूह अरामबाई तेंगगोल (एटी) के सदस्यों ने सड़कों पर टायर जलाए और एटी के सदस्य कनन सिंह की गिरफ्तारी के खिलाफ नारे लगाए. आइए जान लेते हैं कि क्या है अरामबाई तेंगगोल? क्या है इसका काम और क्यों हुआ विवाद?

अरामबाई तेंगगोल वास्तव में एक मैतेई कट्टरपंथी समूह है. इसकी स्थापना मणिपुर में वहां के नाम के राजा और राज्यसभा सदस्य लीशेम्बा सनजाओबा (Leishemba Sanajaoba) ने की थी. आज भी वही इसके चेयरमैन हैं. अरामबाई तेंगगोल को एक कट्टरपंथी समूह या फिर एक कट्टरपंथी सशस्त्र मिलीशिया के रूप में चिह्नित किया जाता है. इस संगठन का उद्देश्य मैतेई समुदाय में हिंदू पूर्व धर्म सनमाही को फिर से स्थापित करना है. इसको राजा Leishemba Sanajaoba के साथ ही साथ पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की छत्रछाया मिली हुई है.

साल 2020 से सक्रिय

अरामबाई तेंगगोल मैतेई भाषा का नाम है. मैतेई भाषा में तेंगगोल का मतलब है ट्रूप या प्लाटून. अरामबाई एक तरह के हथियार का नाम है, जिसका इस्तेमाल कभी मणिपुर के राजा किया करते थे. कहा जाता है कि रामबाई तेंगगोल साल 2020 से ही सक्रिय है. इसकी स्थापना वैसे तो सांस्कृतिक संगठन के रूप में की गई थी पर जल्द ही यह एक कट्टरपंथी संगठन के रूप में सामने आने लगा.

Manipur Protest

प्रदर्शन की आग में जल रहा है इंफाल.

साल 2022 से चर्चा में आया

साल 2022 में यह तब चर्चा में आया, जब बड़ी संख्या में मैतेई युवा इस संगठन के बैनर तले खुद को संगठित करने लगे. राज्य में इस संगठन को काफी राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है. सितंबर 2022 में तो इस संगठन का शपथ ग्रहण समारोह राज्यसभा सदस्य संजाओबा के घर पर हुआ था. इस संगठन के लोग खुद को उन वीरों के समान मानते हैं, जो कभी मैतेई राजाओं के लिए काम करते थे. इस संगठन के सदस्य काली टी-शर्ट वाली एक यूनिफॉर्म पहनते हैं, जिस पर लड़ाई में जा रहे तीन घुड़सवारों की तस्वीर होती है.

 

कुकी समुदाय के लोग लगाते रहे हमले का आरोप

बताया जाता है कि मणिपुर हिंसा के चलते इस समूह के सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. जून 2023 में जहां इसकी 12 इकाइयां थीं, वहीं अब इन इकाइयों की संख्या 60 तक पहुंच गई है. संगठन के कुल सदस्यों की संख्या 60 हजार बताई जा रही है. इस संगठन पर आरोप लगता रहा है कि इसके सदस्य कुकी समुदाय के लोगों को अपना निशाना बनाते रहे हैं. हथियारों के प्रदर्शन, बैकग्राउंड म्यूजिक और उकसावे भले अपमानजनक तरीके से ये लोग कुकी लोगों को निशाना बनाते हैं. कुकी जनजाति के लोगों का आरोप है कि अरामबाई तेंगगोल के लोग उनके गांवों पर हमला करते हैं.

मणिपुर की राजधानी इंफाल में प्रदर्शनों का दौर तब शुरू हुआ था, जब कुकी जनजाति के एक संदिग्ध को अक्तूबर 2023 में एक पुलिस अफसर की स्निफर रायफल से हत्या के आरोप में पकड़ा गया था. पुलिस अफसर Chingtham Anand की हत्या के आरोप में Kamginthang Gangte की गिरफ्तार को कुकी सिविल सोसाइटी के लोगों ने मनमानी गिरफ्तारी करार दिया था. इसके खिलाफ Tengnoupal जिले में बंद का आह्वान भी किया गया था.

 

नस्ली आधार पर बंट चुका राज्य

पुलिस सूत्रों के हवाले से मीडिया में आई रिपोर्ट्स का कहना है कि अब तो राज्य नस्ली आधार पर बुरी तरह से बंट चुका है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) मणिपुर में अरामबाई तेंगगोल के मुखिया Korounganba Khuman के खिलाफ भी कई मामलों की जांच कर रही है पर जांचकर्ताओं को दोनों ही ओर के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है. किसी भी औपचारिक प्रक्रिया के तहत दोनों पक्ष में से किसी की भी गिरफ्तारी के लिए जांचकर्ता आगे बढ़ते हैं, तो विरोध शुरू हो जाता है. इस बार भी हालात इसी कारण बिगड़े हैं, क्योंकि अरामबाई तेंगगोल के सदस्य कनन सिंह को गिरफ्तार किया गया है.

गोलीबारी की आवाज सुनी

इंफाल से रात में आई तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि भीड़ कनन सिंह की रिहाई की मांग कर रही है. स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है कि उन्होंने इंफाल में गोलीबारी की आवाज भी सुनी है. दूसरी ओर, कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अरामबाई तेंगतोल ने राज्यपाल एके भल्ला के आदेश पर लूटे हुए और अवैध हथियार डाल दिए हैं और अब वे अधिकारियों की सुरक्षा की गारंटी पर निशस्त्र हैं. वे मैतेई गांवों पर कुकी समुदाय द्वारा किए गए हमलों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की भी मांग कर रहे हैं.

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