भारत G-7 ग्रुप का हिस्सा क्यों नहीं है, हर साल इसकी समिट कितनी जरूरी?

कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क जे. काॅर्नी के आमंत्रण पर PM नरेंद्र मोदी G-7 शिखर सम्मेलन के लिए वहां पहुंच चुके हैं. इस समिट में 7 देशों अमेरिका, फ्रांस, जापान, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा की भागदारी है. भारत जी-7 का हिस्सा नहीं है, लेकिन वो इस समिट का हिस्सा बना है.ऐसा इसलिए क्योंकि आमतौर पर जी-7 की मेजबानी करने वाला देश ही किसी अन्य देश को न्योता दे सकता है जो जी-7 का हिस्सा नहीं हैं.

2019 से पीएम मोदी हर साल बतौर मेहमान जी-7 देशों की बैठक में हिस्सा लेते आए हैं. कुछ दिन पहले भारत को इस समिट का न्यौता न मिलने पर कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया था. आइए, इसी बहाने जानते हैं, क्या है जी-7, भारत इस ग्रुप का हिस्सा क्यों नहीं है और क्या इस ग्रुप के पास कोई कानूनी पावर है?

क्या है जी-7, क्यों इसे बनाया गया?

जी-7 को ग्रुप ऑफ सेवन भी कहते हैं. यह दुनिया की 7 अर्थव्यवस्थाओं का गठजोड़ है, जो ग्लोबल ट्रेड और अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल सिस्टम पर हावी हैं. इसमें अमेरिका, फ्रांस, जापान, इटली ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा शामिल हैं. पहले इस ग्रुप में रूस भी शामिल था, लेकिन 2014 में जब रूस ने क्राइमिया पर कब्जा किया और रूस को इस ग्रुप को बाहर कर दिया गया. हर साल इसके सातों सदस्य देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं. कनाडा इस बार जी-7 की अध्यक्षता कर रहा है.

जी-7की शुरुआत 1975 में हुई थी. इसका मकसद तेल उत्पादक देशों की तरफ से तेल के एक्सपोर्ट पर लगाई गई पाबंदियों के कारण होने वाली आर्थिक चुनौतियों से निपटना था. इस तरह उस साल 6 देश अमेरिका, फ़्रांस, इटली, जापान, ब्रिटेन और वेस्ट जर्मनी ने मिलकर एक ग्रुप बनाया. इसके ठीक एक साल बाद इसमें कनाडा भी जुड़ा. इस ग्रुप का न तो कोई स्थानीय हेडक्वार्टर है और न ही कोई कानूनी अस्तित्व. हर साल बारी-बारी से सदस्य देश इसकी अध्यक्षता करते हैं. इस साल कनाडा समिट का आयोजन कर रहा है.

भारत G-7 देशों में क्यों नहीं शामिल?

भारत को भले ही समिट के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन यह जी-7 ग्रुप का हिस्सा नहीं है. अब इसकी वजह भी जान लेते हैं. जब जी-7 बना था तब भारत एक विकासशील देश था और गरीबी से जूझ रहा था. अर्थव्यवस्था कमजोर थी और विदेशी निवेश भी सीमित था.

G-7 का गठन विकसित देशों के लिए किया गया था जिनकी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक रूप से मजबूत थीं. भारत उस दौर में इस मानदंड पर खरा नहीं उतर रहा था. G-7 अब अपने ग्रुप का विस्तार नहीं करता. नए सदस्यों को नहीं जोड़ता है. यही वजह है कि भारत इस ग्रुप का हिस्सा नहीं है, लेकिन कई देश आमंत्रण पर बतौर मेहमान इसका हिस्सा जरूर बनते हैं.\

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जी-7 की बैठक क्यों है जरूरी?

जी-7 के देश के मंत्री और अधिकारी पूरे साल बैठकें करते हैं. कई समझौते करते हैं. वैश्विक घटनाओं पर अपना रुख साफ करते हैं. समिट को इसलिए जरूरी माना जाता है क्योंकि हर साल नए मुद्दे तैयार होते हैं जिनका समाधान ढूंढना जी-7 देशों के लिए जरूरी होता है ताकि अर्थव्यवस्था के साथ दूसरे मामलों में ये सातों देश न पिछड़ें.

इस साल होने वाली बैठक में भी कई एजेंडे शामिल किए जाने हैं. इसमें वैश्विक आर्थिक स्थिरता, विकास से लेकर डिजिटल ट्रांजिशन समेत कई वैश्विक चुनौतियां हैं.जी-7 देशों के पास कोई पावर न होने के कारण ये कोई कानून नहीं पारित कर सकते. यही वजह है कि इनके फैसलों का पालन करना भी अनिवार्य नहीं होता.

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